राजस्थान के अब तक के मुख्यमंत्री (1949 से 2025 तक)

 राजस्थान के अब तक के मुख्यमंत्री (1949 से 2025 तक) नीचे दी गई तालिका में दिए गए हैं। वर्तमान में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हैं, जिन्होंने 12 दिसंबर 2023 को पदभार ग्रहण किया था ।

क्रमांकमुख्यमंत्री का नामकार्यकालराजनीतिक दल
1हीरा लाल शास्त्री7 अप्रैल 1949 – 5 जनवरी 1951भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2सी. एस. वेंकटाचारी6 जनवरी 1951 – 25 अप्रैल 1951भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
3जय नारायण व्यास26 अप्रैल 1951 – 3 मार्च 1952भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
4टीका राम पालीवाल3 मार्च 1952 – 31 अक्टूबर 1952भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
5जय नारायण व्यास1 नवम्बर 1952 – 12 नवम्बर 1954भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
6मोहनलाल सुखाड़िया13 नवम्बर 1954 – 13 मार्च 1967, तथा 26 अप्रैल 1967 – 9 जुलाई 1971भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
7बरकतुल्ला ख़ान9 जुलाई 1971 – 11 अक्टूबर 1973भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
8हरिदेव जोशी11 अक्टूबर 1973 – 29 अप्रैल 1977भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
9भैरोसिंह शेखावत22 जून 1977 – 16 फरवरी 1980जनता पार्टी
10जगन्नाथ पहाड़िया6 जून 1980 – 13 जुलाई 1981भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
11शिवचरण माथुर14 जुलाई 1981 – 23 फरवरी 1985भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
12हीरालाल देवपुरा23 फरवरी 1985 – 10 मार्च 1985भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
13हरिदेव जोशी10 मार्च 1985 – 20 जनवरी 1988भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
14शिवचरण माथुर20 जनवरी 1988 – 4 दिसम्बर 1989भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
15हरिदेव जोशी4 दिसम्बर 1989 – 4 मार्च 1990भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
16भैरोसिंह शेखावत4 मार्च 1990 – 15 दिसम्बर 1992 तथा 4 दिसम्बर 1993 – 29 नवम्बर 1998भारतीय जनता पार्टी
17अशोक गहलोत1 दिसम्बर 1998 – 8 दिसम्बर 2003भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
18वसुंधरा राजे8 दिसम्बर 2003 – 11 दिसम्बर 2008भारतीय जनता पार्टी
19अशोक गहलोत12 दिसम्बर 2008 – 13 दिसम्बर 2013भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
20वसुंधरा राजे13 दिसम्बर 2013 – 16 दिसम्बर 2018भारतीय जनता पार्टी
21अशोक गहलोत17 दिसम्बर 2018 – 12 दिसम्बर 2023भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
22भजनलाल शर्मा12 दिसम्बर 2023 – वर्तमानभारतीय जनता पार्टी

भजनलाल शर्मा राजस्थान के 22वें मुख्यमंत्री हैं और भाजपा की सरकार के तहत कार्यरत हैं ।

राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री हीरा लाल शास्त्री थे (1949), और सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर मोहनलाल सुखाड़िया रहे, जिनका कार्यकाल कुल 18 वर्ष से अधिक रहा ।


भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल के मुख्य उपलब्धि क्या रहे

भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे और उन्हें राज्य के “विकास पुरुष” तथा “राजस्थान का एक ही सिंह” कहा जाता है। उनके कार्यकाल (1977–1980, 1990–1992, 1993–1998) में राजस्थान के सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में कई ऐतिहासिक पहलें हुईं ।


भैरोंसिंह शेखावत की प्रमुख उपलब्धियाँ

  1. अंत्योदय योजना की शुरुआत
    शेखावत ने सबसे गरीब वर्ग तक भोजन और सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से “अंत्योदय योजना” शुरू की। यह योजना इतनी प्रभावशाली रही कि बाद में केंद्र और अन्य राज्यों ने भी इसे अपनाया। विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट मैकनामारा ने उन्हें “भारत का रॉकफ़ेलर” कहा था ।

  2. ‘काम के बदले अनाज योजना’
    ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने और अकाल के समय राहत कार्य के लिए यह योजना चलाई गई। इसमें बेरोजगार लोगों को मजदूरी के बदले अनाज दिया जाता था, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिला ।

  3. सती प्रथा के विरोध में निर्णायक कदम
    1987 के रूप कँवर सतीकांड के बाद उन्होंने सती प्रथा के खिलाफ कानून सख्ती से लागू कराया। इस कदम ने समाज में महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई ।

  4. बालिका एवं महिला शिक्षा का प्रसार
    उन्होंने महिला सशक्तिकरण, प्रौढ़ शिक्षा और बालिका शिक्षा के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ ।

5.‘    भामाशाह योजना’ की परिकल्पना
       महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु “भामाशाह योजना” तैयार की, जिसमें महिलाओं के नाम पर बैंक           खाते खोलने और सहायता राशि सीधे भेजने की व्यवस्था की गई ।
       पर्यटन और उद्योग विकास
6.     उन्होंने “हेरिटेज होटल” और “ग्रामीण पर्यटन” की अवधारणा दी, जिससे राजस्थान का पर्यटन क्षेत्र राष्ट्रीय           और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरा। इसके अलावा खनन, सड़क और निवेश नीति में सुधार कर औद्योगिक                विकास को गति दी

7.    जनसंख्या नियंत्रण नीति पंचायत चुनावों में अधिक संतान वाले प्रत्याशियों पर प्रतिबंध लगाकर उन्होंने
      परिवार नियोजन के प्रति समाज को जागरूक किया – यह कदम उस समय के लिए साहसिक माना गया ।

भैरोंसिंह शेखावत को उनके प्रशासनिक कौशल, कठोर अनुशासन और जनता से सीधे संवाद के लिए जाना जाता है। उन्हें “राजस्थान का लौहपुरुष” भी कहा गया, और वर्ष 2010 में उनके निधन के बाद तक वे राजस्थान की राजनीति के सबसे सम्मानित नेताओं में रहे ।


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